Saturday, 3 February 2018

Maha Shivaratri 2018 in Maharashtra



Tuesday
13 February
Maha Shivaratri 2018 in Maharashtra

महाशिवरात्रि 2018: जानिए शिव पूजा का शुभ मुहूर्त




भगवान शिव ब्रह्मांड के रक्षक हैं और साथ ही साथ विनाशक भी। वह नकारातमकता और बुरी शक्तियों का विनाश कर उसके स्थान पर शुभता और पवित्रता की स्थापना करते हैं...उसके रक्षा करते हैं। वे समस्त बुराइयों का नाश करते हैं, वे तंत्र-मंत्र के जनक भी हैं।
वैसे तो सप्ताह का हर सोमवार देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित हैं लेकिन शिवरात्रि एक ऐसा अवसर है जब महादेव के भक्त उनकी पूरी श्रद्धा और तन्मयता के साथ पूजा करते हैं, उनके प्रति अपनी आस्था का प्रदर्शन करते हैं।
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रति माह शिवरात्रि का त्यौहार आता है, लेकिन फाल्गुन के महीने में आने वाली शिवरात्रि को ‘महाशिवरात्रि; के तौर पर बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
इस माह यह पर्व 13 तारीख को है, जाहिर तौर पर सभी शिव मंदिरों में इस शिवोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शिव भक्त भी इस दिन को लेकर अति उत्साहित रहते हैं, क्योंकि इस दिन वह अपने अराध्य देव को प्रसन्न कर उनसे मनचाही मुराद मांग सकते हैं।




  • जिस तरह हिन्दू धर्म में दिन, समय और मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है उसी तरह यह भी आवश्यक है कि विशेष फल प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जाए।
  • निशिथ काल पूजन: 24:09 से 25:01 (13 फरवरी)
    चतुर्दशी तिथि आरंभ: 22:34 (13 फरवरी)

Friday, 5 January 2018



शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्रहै। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धाङ्गिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है।
भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं।

श्री शिव पूजन मंत्र | 








श्री शिव पूजन मंत्र| Shri Shiv Poojan Mantra
श्री शिव के पूजन में शिव मंत्रों (Shiv Mntr) का जप मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। ऐसी मान्यता है कि मंत्रों द्वारा की गई पूजन भगवान (Bhagwan) तक सरलता से पहुंचती है, क्योंकि इसमें वाणी द्वारा भगवान की स्तुति होती है। जानते हैं शिव पूजन के सरल मंत्रों के बारे में।
भगवान शंकर का पंचाक्षर मंत्र
शिव पंचाक्षर मंत्र (Shri Shiv Panchakshar mantra) भगवान शंकर को अतिप्रिय है। शिव पूजन में रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 108 बार पाठ किया जाना चाहिए। यह मंत्र शिव को अतिशीघ्र प्रसन्न करता है। यह मंत्र मनोकामना पूर्ति में सहायक है।
ऊँ नमः शिवाय।
शिव गायत्री मंत्र
ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।।
द्वादश ज्योतिर्लिंग मंत्र
सौराष्ट्रे सोम्नथन्च, श्री शैलेमल्लिकार्जुनं।
उज्जैन्यांमहाकालं मोम्कारं ममलेश्वरं।।
परल्यां वैद्यनाथं च, दाखिन्यां भीमशन्करं।
सेतुबन्धेतुरामेषं नागेशं दारुकावने।।
वाराणष्यां तु विश्वेशं, त्रयंबकं गौतमि तटे।
हिमालये तु केदारं धुश्मेषं च शिवालये।।
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि, सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्त जन्म कृतं पापं स्मरेण विनश्यति।।
शिव मंत्र
ऊँ पार्वतीपतये नमः।
ऊँ नमो नीलकण्ठाय।
ऊँ साम्ब शिवाय नमः।
शिव नमस्कार मंत्र
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शन्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिर्ब्रम्हणोधपतिर्ब्रम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।

शिव को प्रसन्न करने के उपाय (राशि अनुसार)







Bhagwan Shiv ko kaise Khush kare : सभी देवताओं में भगवान शिव एक ऐसे देवता है जो अपने भक्तों की पूजा पाठ सेबहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है इसलिए इन्हें भोलेनाथ कहा जाता है और यही कारण था की असुर भी वरदान प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की तपस्या किया करते थे और उनसे मनचाहा वरदान प्राप्त कर लेते थे।  आज हम आपको यहाँ पर राशि अनुसार, शिव पूजन के कुछ ऐसे आसान उपाय बता रहे है।

मेष- इस राशि का स्वामी मंगल है और मंगल का पूजन शिवलिंग रूप में ही किया जाता है। इस राशि के लोग शिवलिंग पर कच्चा दूध एवं दही अर्पित करें। साथ ही, भोलेनाथ को धतुरा भी अर्पित करें। कर्पूर जलाकर भगवान की आरती करें।
वृषभ- वृष राशि के लोग किसी भी शिव मंदिर जाएं और भगवान शिव को गन्ने के रस से स्नान करवाएं। इसके बाद मोगरे का ईत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। अंत में भगवान को मिठाई का भोग लगाएं एवं आरती करें।
मिथुन- आप स्फटिक के शिवलिंग की पूजा करेंगे तो श्रेष्ठ रहेगा। यदि स्फटिक का शिवलिंग उपलब्ध न हो तो किसी अन्य शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है। मिथुन राशि के लोग लाल गुलाल, कुमकुम, चंदन, ईत्र  आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। आक के फूल अर्पित करें। मीठा भोग लगाकर आरती करें।
कर्क- इन लोगों को अष्टगंध एवं चंदन से शिवजी का अभिषेक करना चाहिए। बैर एवं आटे से बनी रोटी का भोग लगाकर शिवलिंग का पूजन करें। शिवलिंग पर प्रतिदिन कच्चा दूध अर्पित करें और साथ ही जल भी चढ़ाएं।
सिंह- इस राशि के लोगों को फलों के रस एवं पानी में शकर घोलकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही, शिवजी को आंकड़े के पुष्प अर्पित करें, मिठाई का भोग लगाएं। पुष्प के साथ ही बिल्व पत्र भी अर्पित करें।
कन्या- आप महादेव को बैर, धतुरा, भांग और आंकड़े के फूल अर्पित करें। साथ ही बिल्व पत्र पर रखकर नैवेद्य अर्पित करें। अंत में कर्पूर मिश्रित जल से अभिषेक कराएं। शिवजी के पूजन के बाद आधी परिक्रमा अवश्य करें। ऐसा करने पर बहुत ही जल्द शुभ फल प्राप्त होते हैं।
तुला- तुला राशि के लोग जल में तरह-तरह फूल डालकर उस जल से शिवजी का अभिषेक करें। इसके बाद बिल्व पत्र, मोगरा, गुलाब, चावल, चंदन आदि भोलेनाथ को अर्पित करें। अंत में आरती करें।
वृश्चिक- इन लोगों को शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शहद, घी से स्नान कराने पश्चात पुन: जल से स्नान कराएं एवं पूजन कर आरती करें।  लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। पूजन के बाद मसूर की दाल का दान करें।
धनु- धनु राशि के लोग भात यानी चावल से शिवलिंग का श्रृंगार करें। पहले चावल को पका लें, इसके बाद पके हुए चावल को ठंडा करके शिवलिंग का श्रृंगार करें। सुखे मेवे का भोग लगाएं। बिल्व पत्र, गुलाब आदि अर्पित करके आरती करें।
मकर- आप गेंहू से शिवलिंग को ढंककर, विधिवत पूजन करें। पूजन-आरती पूर्ण होने के बाद गेंहू का दान जरूरतमंद लोगों को कर दें। इस उपाय से आपकी सभी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
कुंभ- इन लोगों को यह उपाय करना चाहिए- सफेद-काले तिल को मिलाकर किसी ऐसे शिवलिंग पर चढाएं जो एकांत स्थान में स्थित हो। जल में तिल डालकर शिवलिंग को अच्छे से स्नान कराएं। इसके बाद काले-सफेद तिल अर्पित करें, पूजन के आद आरती करें।
मीन- इस राशि के लोगों को रात में पीपल के नीचे बैठकर शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। इस समय ऊँ नम: शिवाय का पैंतीस (35) बार उच्चारण कर बिल्व पत्र चढ़ाएं तथा आरती करें। शिवलिंग पर चने की दाल चढ़ाएं और पूजन के बाद इसका दान करें।


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